Description
मंगल और राहु कुंडली के किसी भी घर में साथ हो, तो अंगारक योग (Angarak Dosh Puja in Ujjain) बनता है। यह योग अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देने वाला है। हालांकि कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा है, उस भाव को ये पीड़ित कर देते हैं। इससे व्यक्ति के जीवन में लड़ाई-झगड़े की स्थिति बनी रहती है।
कुंडली में अंगारक दोष कब बनता है और उसके क्या प्रभाव पड़ते है?
केवल अंगारक योग बन जाने से यह निश्चित नहीं होता कि व्यक्ति के जीवन में कोई समस्या होगी। उसका प्रभाव देखने के लिए भाव, राशि, दोनों ग्रहों की डिग्री, लग्न, गुरु/शुभ ग्रहों की दृष्टि और दशा भी देखी जाती है
| भाव | मुख्य क्षेत्र | अंगारक योग की पारंपरिक व्याख्या |
|---|---|---|
| 1st (लग्न) | व्यक्तित्व, शरीर | क्रोध, जल्दबाजी, आक्रामकता |
| 2nd | धन, परिवार, वाणी | कठोर वाणी, पारिवारिक मतभेद, धन में उतार-चढ़ाव |
| 3rd | साहस, भाई-बहन | जोखिम लेने की प्रवृत्ति, भाई-बहनों से तनाव |
| 4th | माता, घर, संपत्ति | घरेलू अशांति, संपत्ति/वाहन संबंधी बाधाएँ |
| 5th | शिक्षा, संतान, प्रेम | प्रेम संबंधों में तनाव, शिक्षा या संतान संबंधी चिंता |
| 6th | रोग, ऋण, शत्रु | विवाद, प्रतिस्पर्धा और ऋण संबंधी परिस्थितियाँ |
| 7th | विवाह, साझेदारी | वैवाहिक मतभेद, साझेदारी में तनाव |
| 8th | अचानक घटनाएँ, विरासत | अचानक बाधाएँ, मानसिक दबाव, परिवर्तन |
| 9th | भाग्य, धर्म, पिता | भाग्य में उतार-चढ़ाव, पिता/गुरु से मतभेद |
| 10th | करियर, कर्म | करियर में संघर्ष, कार्यस्थल पर विवाद |
| 11th | लाभ, आय, मित्र | लाभ के साथ उतार-चढ़ाव, मित्रों से मतभेद |
| 12th | खर्च, विदेश, नींद | अनावश्यक खर्च, बेचैनी, विदेश संबंधी परिस्थितियाँ |
अंगारक योग (Angarakh Dosh Puja in Ujjain) के कारण व्यक्ति का स्वभाव आक्रामक, हिंसक तथा नकारात्मक हो जाता है। अपने भाइयों, मित्रों तथा अन्य रिश्तेदारों के साथ भी संबंध भी खराब हो जाते हैं। धन संबंधित परेशानियां भी बनी रहती है। अगर किसी महिला की कुंडली में यह योग हो तो उसे संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती है। इस योग के शांति के उपाय न करने पर लंबे समय तक परेशानियों से जूझना पड़ सकता है।
Angarak Dosh Nivaran Puja in Ujjain
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अंगारक दोष पूजा उज्जैन में ही क्यों ?
उज्जैन स्थित श्रीअंगारेश्वर महादेव, प्राचीन 84 महादेवों में 43वाँ स्थान रखते हैं जो की पावन शिप्रा नदी के तट पर स्थित हैं, यह वही शिप्रा नदी है जहाँ पर भगवान श्री राम ने अपने पिता दशरथ जी का श्राद्ध किया था, और पुराणों के अनुसार शिप्रा नदी भगवान विष्णु के अवतार वराह के हृदय से निकली है और यही मंगल (मंगल ग्रह) की जन्मभूमि भी है, यही मंगल संबंधी दोषों के निवारण के लिए अंगारेश्वर महादेव की पूजा की जाती है। श्री अंगारेश्वर महादेव, उज्जैन में कर्क रेखा के निकट मंगल ग्रह का एक रूप है, और इसे धरती (भौ) माता का पुत्र भी माना जाता है इस मंदिर की स्थापना न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य ने की थी।
ऐसा संत जनो का विस्वास है की भगवान अंगारेश्वर महादेव की पूजा करने से संतान, धन, भूमि, संपत्ति और यश की प्राप्ति होती है साथ ही भूमि संबंधी व्यर्थ के विवादों का सरल समाधान होता है और श्री अंगारेश्वर भगवान के दर्शन करने और पूजा करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।









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